बाक्साईट खनन के खिलाफ उड़ीसा के सबसे ऊँचे पहाड़ की चोटी पर आदिवासियों का जमावड़ा

कोरापुट, 21 मार्च 2011 को लगभग 15000 आदिवासियों तथा परंपरागत वन निवासी समुदाय के लोगों ने देवमाली रेंज में बाक्साइट खनन के खिलाफ अपनी एकता तथा ताकत का प्रदर्शन किया। यह सभी लोग कोरापुट जिले के अलग-अलग 4 ब्लॉक से देवमाली पहाड़ पर एकत्रित हुए थे, जो कि उड़ीसा की सबसे बड़ी चोटी है तथा जिसकी ऊंचाई 1673 मीटर है। यह बैठक देवमाली आंचलिक परिवेश सुरक्षा मंच द्वारा आयोजित की गई थी। इस बैठक में 10 से ज्यादा जनसंघर्षों जैसे- चासी मूलिया आदिवासी संघ, देवमाली सुरक्षा समिति, नियामगिरि सुरक्षा समिति तथा अन्य जनसंघर्षों के अलावा कई संगठनों जैसे कुई समाज, प्रजा समाज, दुरूआ समाज, माली समाज, मटिया समाज तथा गदाबा समाज के नेताओं ने भी शिरकत करके अपनी एकजुटता दिखाई।
इस बैठक में हजारों आदिवासी तीन दिन तक पैदल चलकर मीटिंग के स्थान पर पहुंचे जो कि बधंदुगन तथा नारायन पटना से लगभग 70 कि. मी. दूर है। आदिवासियों ने यह भी बताया कि पोदा पादर तथा नारायन पटना पर तैनात बी.एस.एफ. के जवानों ने कई महिलाओं तथा आदमियों को देवमाली मीटिंग में जाने के खिलाफ धमकाया।

आदिवासियों के मन में यह डर भी था कि बैठक में आने के बाद कहीं उन्हे बी.एस.एफ. के जवानों द्वारा मार-पीट का सामना न करना पड़े। आदिवासियों ने सुरक्षा बलों पर यह भी आरोप लगाया कि बैठक से दो दिन पहले बसंतपुर गांव में बी.एस.एफ. के जवानों ने कई आदमियों तथा नौजवानों को पीटा ताकि वह देवमाली की बैठक में हिस्सा न ले सकें। यहां तक कि पुलिस ने उन वाहनों को भी जबरन रोक दिया जो कि बैठक में हिस्सा लेने जा रहे थे। जिसके फलस्वरूप बहुत सारे लोगों को बहुत लंबे रास्ते से जाना पडा़ और वह बैठक में तब पहुंचे जब कि वह लगभग खत्म होने वाली थी।
बैठक से पहले एक रैली भी निकाली गई। रैली में बड़ी तादाद में औरतें, बच्चें, भी शामिल हुए जो कि लगातार नारे लगा रहे थे तथा आदिवासी संगीत पर नाच रहे थे। बैठक को सबसे पहले चासी मूलवासी संघके नेता नचिका लिंगा ने सम्बोधित किया। चासी मूलिया आदिवासी संघ के 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं पर से मुकदमा वापिस लेने की मांग से संबंधित संवाद वार्ता शुरू होने के बाद नाचिका लिंगा जनता में तीसरी बार नजर आये।

नाचिका लिंगा ने सभी जनसंघर्षों के लोगों से जंगल-जमीन-पहाड़ तथा नदियों की कॉरपोरेटी लूट के खिलाफ संघर्ष में एक हो जाने का आह्वान किया।
उन्होंने आगे कहा कि देवमाली पर खनन करने से पानी की 70 धाराओं का स्रोत भी खत्म हो जायेगा। इन धाराओं पर क्षेत्र के हजारों आदिवासी किसानों की जमीने सिंचाई के लिए आश्रित हैं। उन्होंने लोगों से अपनी जीविका के स्रोत को पूंजीपतियों तथा सरकार से बचाने तथा उसकी रक्षा करने का आह्वान किया।

बैठक को गोपालपुर के विधायक नारायण रेड्डी ने भी सम्बोधित किया उन्होंने लोगों को याद दिलाते हुए कहा कि अगर वह   गोपालपुर से टाटा को उखाड़ कर बाहर फेंक सकते हैं तो वह ऐसी किसी भी कंपनी का सफलता से विरोध कर सकते हैं जो माइनिंग अर्थात् मुनाफे के लिए उनकी जमीन को हड़पना चाहती है। संतोष प्रधान, उड़ीसा से



Share on Google Plus

संघर्ष संवाद के बारे में

एक दूसरे के संघर्षों से सीखना और संवाद कायम करना आज के दौर में जनांदोलनों को एक सफल मुकाम तक पहुंचाने के लिए जरूरी है। आप अपने या अपने इलाके में चल रहे जनसंघर्षों की रिपोर्ट संघर्ष संवाद से sangharshsamvad@gmail.com पर साझा करें। के आंदोलन के बारे में जानकारियाँ मिलती रहें।