आदिवासियों को हथियार थमाना असंवैधानिक: सुप्रीम कोर्ट

देश की शीर्ष अदालत ने माओवादियो के खिलाफ लड़ाई में सलवा जुडूम जैसे समूहों को तैनात करने की आलोचना की है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकारों से कहा कि वे विशेष पुलिस अधिकारियों (एसीओ) के नाम पर आदिवासियों को हथियारबंद करने से परहेज करें। इस तरह एसपीओ की नियुक्ति को अदालत ने असंवैधानिक बताया। शीर्ष अदालत ने इस साल मार्च में सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश पर हुए हमले की छत्तीसगढ़ सरकार की जांच पर असंतोष जताते हुए इसकी सीबीआई से जांच कराने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने समाजशास्त्री नंदिनी सुंदर, इतिहासकार रामचंद्र गुहा,पूर्व नौकरशाह ईएएस सरमा और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार को यह निर्देश देने की मांग की थी कि वह सलवा जुडूम को कथित तौर पर समर्थन न दे। इस याचिका पर चार मई को हुई सुनवाई में राज्य सरकार ने एसपीओ की नियुक्ति को सही ठहराया था। उसका कहना था कि एसपीओ बेहतर तरीके से पुलिस का काम कर रहे हैं। वे माओवाद विरोधी अभियानों में एसपीओ गाइड, अनुवादक, जगहों का पता लगाने और कुछ अन्य मामलों में काफी उपयोगी होते हैं। कई मौकों पर उन्होंने सुरक्षाकर्मियों की जान बचाई है और राहत शिविरों पर माओवादी हमले को रोका है।

न्यायमूर्ति बी सुदर्शन रेड्डी और न्यायमूर्ति एसएस निज्जर की पीठ ने कहा कि छत्तीसगढ़ में एसपीओ के मामले संवैधानिक सीमाओं के अतिक्रमण को दशार्ते  हैं। 
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