राष्ट्रीय सम्मेलन: परमाणु हथियार मुक्त दुनिया की ओर

परमाणु निःशस्त्रीकरण एवं शांति गठबंधन (सी.एन.डी.पी.) की तरफ से अपनी स्थापना की 10वीं वर्षगांठ के मौके पर 10 से 12 दिसंबर 2010 को दिल्ली के कान्स्टीट्यूशन क्लब के लॉन में परमाणु हथियार मुक्त दुनियाके विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों, परमाणु के खतरों तथा शांति के लिए संघर्षरत भारत के विभिन्न संगठनों, व्यक्तियों तथा जनसंघर्षों के साथ ही साथ पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधियों ने भी शिरकत की। तीन दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन पर परमाणु ऊर्जा, परमाणु अस्त्रों से जुड़े तमाम सवालों पर चर्चा की गयी। सम्मेलन को एडमिरल रामदास, अचिन वनायक, सुकला सेन, अनिल चौधरी, इलिना सेन, मणिशंकर अय्यर, जॉन हालम, करामत अली, क़मर आग़ा, अनुराधा चेनाय, अमरजीत कौर, ललिता रामदास, प्रफुल्ल बिदवई, एम. वी. रमना, एस. पी. उदयकुमार, कमल मित्र चेनॉय डा. जितेन्द्र सिंह, श्री प्रकाश, डा. सरूप धु्रव, एन. डी. जय प्रकाश, देवाशीष, संदीप सेठी, पंकज बिष्ट, कविता श्रीवास्तव एवं अनुराधा सेन ने संबोधित किया।

सम्मेलन के आखि़री दिन सम्मेलन की तरफ से दिल्ली घोषणाजारी किया गया। इस घोषणा में मुख्य तौर पर जा़ेर दिया गया कि जयपुर तथा नागपुर में सी.एन.डी.पी. द्वारा जारी घोषणाओं पर हम कायम हैं तथा हमारा मुख्य ज़ोर- है कि ‘‘परमाणु हथियारों का उपयोग, उपयोग की धमकी/भय, और परमाणु हथियारों के बनाने की तैयारी को हम अनैतिक, अवैधानिक मानते हैं और यह राजनीतिक तौर पर किसी भी हालत में हमें स्वीकार्य नहीं है।
हालांकि भारत और पाकिस्तान में 1998 के बाद कोई परमाणु परीक्षण नहीं हुआ है परंतु अग्नि एवं हट्ज मिसाइल की टेस्टिंग तथा भारत-अमरीका परमाणु समझौता बड़े ख़तरे खड़ा करता जा रहा है।
अतएव सी.एन.डी.पी. का चौथा सम्मेलन संकल्प लेता है कि-
  • दक्षिण एशिया परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र हो।
  • परमाणु निशस्त्रीकरण पर वैश्विक घोषणा-पत्र जारी हो।
  • परमाणु ऊर्जा के खतरनाक प्रभाव और सुरक्षा की अनदेखी के खि़लाफ संघर्षों को तेज किया जाय।
  • ईराक और अफगानिस्तान में कब्जे को खत्म करने की मांग, फिलिस्तीन समस्या का न्यायपूर्ण समाधान, जिससे  वैश्विक शांति सुनिश्चित हो तथा परमाणु निशस्त्रीकरण में वह मदद कर सके।
इसके साथ ही साथ सी.एन.डी.पी. उपरोक्त उद्देश्यों को लेकर हस्तक्षेप करने तथा संघर्ष करने वाली सभी वैश्विक तथा क्षेत्रीय ताकतों के साथ अपनी एकजुटता का इज़हार करता है।
Share on Google Plus

संघर्ष संवाद के बारे में

एक दूसरे के संघर्षों से सीखना और संवाद कायम करना आज के दौर में जनांदोलनों को एक सफल मुकाम तक पहुंचाने के लिए जरूरी है। आप अपने या अपने इलाके में चल रहे जनसंघर्षों की रिपोर्ट संघर्ष संवाद से sangharshsamvad@gmail.com पर साझा करें। के आंदोलन के बारे में जानकारियाँ मिलती रहें।