गोरखपुर में तेज हुआ परमाणु संयंत्र विरोध

हरियाणा प्रदेश में जहां मुआवजे के आंदोलन ज्यादा हो रहे हैं वहीं अपनी जमीन किसी भी कीमत पर न देने के सवाल पर यह आंदोलन अपना अलग महत्व रखता है। आंदोलन को और तेज करने के लिए स्थानीय युवाओं के जगह-जगह पर शिविरों का आयोजन करने का निर्णय लिया गया है। लोगों को जागरूक तथा संगठित करने का स्थानीय आंदोलनकारी लागातार प्रयास कर रहे हैं।

कारपोरेटी उपनिवेशवाद के खिलाफ एवं जल-जंगल-जमीन व जीने के अधिकार के लिए संघर्षरत नये समाज की रचना के लिए प्रतिबद्व आजादी बचाओ आंदोलन का हरियाणा के फतेहाबाद जिले के गांवों में जन जागरण अभियान सम्पन्न हुआ।

गोरखपुर में लगने वाले परमाणु ऊर्जा संयंत्र की सरकारी योजना के विरोध में स्थानीय किसान पिछले 11 महीनों से धरने पर बैठे हैं। लोगों को परमाणु खतरों के प्रति सचेत करने के लिए परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेन्द्र गडेकर के नेतृत्व में 20 जून से 27 जून 2011 तक एक जन जागरण अभियान का आयोजन किया गया जिसके अर्न्तगत कुम्हारिया, सावरवास, नहला, सिवानी, दहमान, गोरखपुर व आस-पास की ढाणीयों में परमाणु खतरों पर आधारित डाक्युमेंट्री फिल्मों का प्रदर्शन किया गया, लोगों से बातचीत एवं परचों का वितरण किया गया।

गौरतलब है कि यह प्रस्ताावित स्थान सिंचित, बहु फसली होने के साथ ही साथ, हड़प्पा-सिंधु घाटी के भी कुछ स्थान यहां पर हैं जो की प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर हैं। इस जन जागरण अभियान के दौरान लोगों के बीच में कुछ बिन्दुओं को रखा गया -

पहलाः सरकारी तथ्यों का दावा है कि परमाणु संयंत्र सुरक्षित व टिकाऊ है। यह गलत है क्योंकि दुनिया में अब तक लगे सभी परमाणु संयंत्र असुरक्षित हैं इसका ताजा उदाहरण फुकुशिमा (जापान) का है लेकिन सरकार इससे भी सबक लेने को तैयार नहीं हैं। भारत में अरेवा कम्पनी जो परमाणु संयंत्र सप्लाई करने वाली है उसमें 50 से भी ज्यादा गंभीर खामियां हैं।

दूसरा: सरकार लोगों में भ्रम पैदा करने के लिए प्लांट के पक्ष में दूसरा दावा कर रही है कि इस संयंत्र के लग जाने से क्षेत्र में बेरोजगारी का समाधान होगा। इस संयंत्र में केवल 200 लोगों को रोजगार मिलेगा वह भी शर्तों पर। जहां 1313 एकड़ जमीन पर हजारों लोग अपना जीवन गुजार रहे है वहां पर संयंत्र की रोजगार नीति समझ से परे है।

तीसरा: सरकार लोगों को सुनहरा सपना दिखा रही है कि इस संयंत्र के लग जाने के कारण उन्हे भरपूर बिजली मिलेगी। यह अत्यंत विस्मय व झुठ पर आधारित है क्योंकि यह यूरेनियम से बनी बिजली जो अत्यंत महगी होगी तथा इसकी प्रक्रिया भी अलग होगी, इसमें ज्यादा या कम या पावर कट के लिए कोई प्रावधान नहीं होता है।



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