नयी राजधानी के लिए विस्थापन स्वीकार्य नहीं : किसानों की महापंचायत, लाठी चार्ज एवं गिरफ्तारी

छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी से महज 20 किलोमीटर की दुरी पर एक नयी राजधानी बसाने की योजना, वहां के 27 गांवों के किसानों के सामने एक त्रासदी से किसी भी रूप से कम नहीं है। इस नयी राजधानी परियोजना के अन्तर्गत 27 गांवों की 23 हजार हैक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है परंतु किसान अपनी अत्यधिक उपजाऊ भूमि देने को तैयार नहीं है क्योंकि किसान खेती पर निर्भर हैं।
इस परियोजना के विरोध में 24 सितम्बर 2011 को रायपुर के नेताजी सुभाष स्टेडियम में किसान कल्याण समिति के बैनर के तले एक महापंचायत का आयोजन किया गया। इस महापंचायत में 27 गांवों के प्रभावित किसानों ने अपनी बातों को रखा।  महापंचायत में नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री व सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने विकास के नाम पर किसानों को उजाड़ने का विरोध करते हुए कहा कि यहां के लोगों ने छत्तीगढ़ की मिट्टी को बचाने का काम किया है जबकि देश भर में सरकार भूमि घोटाले कर अरबों रूपये कमा रही है। भ्रष्टाचार-अत्याचार, सरकार के पास दो काम रह गये है। किसानों से बर्बरता पूर्वक जमीनें छीनकर बड़े-बड़े उद्योगपतियों को बेची जा रही हैं।

महापंचायत के बाद किसान भूमि अधिग्रहण विरोधी नारे लगाते हुए रैली के रूप में मुख्यमंत्री के निवास की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने पहले बल प्रयोग किया उसके बाद बिना अनुमति के रैली निकालने के आरोप में किसानों को गिरफ्तार कर लिया गया। महापंचायत में चेरिया, पौता, बंजारी, भेलवाडीह, तुता, नवागांव, खपरी, सेंध, टीको, उपरवारा, तेंदुआ, छतौना, पचेड़ा आदि गावों के प्रतिनिधियों सहित ग्रामीण मौजूद थे। महापंचायत को रूपम चंद्राकर, दाऊराम, गौतम बंधोेपाध्याय, गुलाम ठाकुर, बीरेन्द्र पाण्डे, महेन्द्र चंद्राकर आदि लोगों ने भी संबोधित किया।
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