छिंदवाड़ा के पास जारी है, अडानी पेंच पावर प्लांट का पुरजोर विरोध


मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के पास चौसरा गांव में 1320 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट अडानी ग्रुप लगाने जा रहा है। थर्मल प्लांट के लिए पेंच नदी पर दो बांध बनाकर बिजली घर को पानी दिए जाने की योजना है। इस योजना से किसानों की जमीन और पानी दोनों छीन जायेगा। इस परियोजना का     दिलचस्प पहलू यह है कि जिस जमीन पर किसान खेती कर रहे हैं वह जमीन मध्य प्रदेश सरकार 1986-87 में ही 1500 से 10000 हजार रूपये प्रति एकड़ के हिसाब से अधिग्रहित कर चुकी थी। उस समय अधिग्रहण का कारण बताया था कि यहां पर मध्य प्रदेश विद्युत मण्डल बिजली का कारखाना लगाएगा। किसानों से वादा किया गया कि कारखाने में परिवार के एक सदस्य को नौकरी, जमीन के बदले जमीन और निःशुल्क बिजली दी जाएगी। हालांकि तब कारखाना नहीं बना और किसान उसी समय से इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं। इसी जमीन को सरकार ने 25 वर्ष बाद अडानी कम्पनी को 13.5 लाख प्रति एकड़ की दर से बेच दिया, किसान सरकार द्वारा जमीन बेचे जाने का विरोध कर रहे हैं। इस परियोजना से कुल 33 गांव विस्थापित होंगे और 50 हजार की आबादी सीधे प्रभावित होगी।


इस परियोजना के विरोध में संघर्षरत किसान संघर्ष समिति के साथी डॉ. सुनीलम तथा आराधना भार्गव पर 22 मई 2011 को किसान पंचायत में भाग लेने जाते समय कम्पनी के गंुडों द्वारा हमला किया गया। इस पूरे घटनाक्रम पर किसान संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम 31 मई को जिलाधीश को ज्ञापन सौंपा-

छिन्दवाड़ा/दिनांक 31 मई 2011

प्रति,       श्री शिवराजसिंह चौहान जी,  मुख्यमत्री,           
                मध्यप्रदेश शासन - भोपाल।
द्वारा:- जिलाधीश महोदय, जिला छिन्दवाड़ा।

हम अदानी पेंच पॉवर लि मि0  प्रोजेक्ट तथा पेंच व्यपवर्धन परियोजना से प्रभावित किसान आपका ध्यान निम्न तथ्यों की ओर आकृष्ट करना चाहते है-
1. हमारी जमीनें एमपीईबी द्वारा 1986-87 में डेढ़ हजार रूपए से 10 हजार रूपए प्रति एकड़ की दर से जबरदस्ती,  रोजगार का लालच देकर अधिग्रहित की गई थीं।
2. हाल ही में कुछ माह पूर्व हम किसानों को ज्ञात हुआ कि हमारी जमीन शासन ने अदानी कम्पनी को 13.50 लाख रूपए प्रति एकड़ की दर से बेच दी है।
3. जमीन लेते समय तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं स्थानीय अधिकारियो द्वारा हमे यह आश्वासन दिया गया था कि  एमपीईबी हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देगी तथा निःशुल्क बिजली किसानों को प्रदान करने के साथ साथ जमीन के बदले जमीन दी जायेगी। एमपीईबी ने यह भी वायदा किया था कि उत्पादन होने वाली बिजली को लागत मुल्य पर प्रदेश के किसानों को दिया जायेगा। लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा किसानों से किया गया एक भी वायदा पूरा नही किया गया। विषम स्थिति में फंसे हुए किसान और उन जमीनों से आजीविका प्राप्त करने वाले अन्य लोगों के सामने इसके अलावा कोई विकल्प नही बचा कि वे उस भूमि पर अपना कब्जा बरकरार रखे। अदानी पेंच पॉवर लिमि. को हमारे क्षेत्र में घुसने की इजाजत देना गलत हैं और हम उसको अस्वीकार करते हैं।

हम आपसे आग्रह करेंगे कि अदानी के द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यो  पर तत्काल रोक लगाई जाये। अब तक किए गऐ  कार्यो को तत्काल ध्वस्त किया जाय यही नहीं अदानी कम्पनी के  कर्मचारियों के इस क्षेत्र में प्रवेश पर प्रतिबन्ध लगाया जाय तथा बिना अनुमति के काम शुरू करने के कारण जुर्माना कर कम्पनी को देशभर में ब्लैक लिस्ट किया जाय।

4. राज्य सरकार ने जमीन, बिजली का व्यापार करने वाले कम्पनी को लाभ कमाने के लिए सौंप दी है। कल्याणकारी राज्य को हमारी जमीन से लाभ कमाने के लिए अधिग्रहित करने का कानूनी अधिकार नही है।
5. उपरोक्त स्थिति में आज किसानों से ली गई जमीनें हमें वापस दिलायी जायें ।    
6. हमारी यह भी मांग है कि 1987 से लेकर अब तक हर फसल के औसत उत्पादन के बाजार मूल्य की दर पर हमें क्षतिपूर्ति प्रदान की जाये।
7. हमारी यह मांग है कि हमारी जिन जमीनों को अदानी कम्पनी द्वारा खुदाई करके तथा अन्य तरीकों से बर्बाद किया गया है उन जमीनों को पुनः खेती योग्य बनाकर हमें हमारी जमीन का मालिकाना हक प्रदान किया जाये।
8. तत्काल अदानी कम्पनी को सरकार निर्देशित करे कि वह किसानों को खेती करने से न रोके तथा फिर भी रोके जाने की स्थिति में कम्पनी पर कानूनी कार्यवाही की जाये।
9. हम किसानों का प्रतिनिधि मण्डल पर्यावरण मंत्री श्री जयराम रमेश जी से मिला था। उन्होंने हमें बताया गया था कि अदानी पेंच पॉवर लिमि0 को अब तक पर्यावरण मंत्रालय द्वारा अनुमति पत्र प्रदान नही किया गया हैं ऐसी स्थिति में अदानी प्रोजेक्ट द्वारा कोई निर्माण कार्य नही किया जा सकता।
10. आज की स्थिति में कोई भी किसान किसी भी दर पर अदानी प्रोजेक्ट को जमीन देने के लिए तैयार नही है।
11. आपसे अनुरोध है कि कम्पनी द्वारा जमा किए गए इन फर्जी कागजातों के आधार पर जमीन सम्बन्धी कोई कार्यवाही नही की जाये।
12. आप जानते ही हैं कि 22 मई को शाम 5.30 बजे अदानी द्वारा पूर्व विधायक डॉ0 सुनीलम तथा किसानो के आंदोलन का नेतृत्व कर रही एड0 आराधना भार्गव पर कांग्रेस के स्थानीय नेता तथा अदानी प्रोजेक्ट में ठेकेदारी कर रहे गुण्डो द्वारा जानलेवा हमला किया गया जिसका मक्सद हम किसानों के आंदोलन को नेतृत्वविहीन करना तथा हम किसानों को भयभीत करना था।
13. हम यह भी उल्लेख करना चाहते हैं कि अदानी कम्पनी द्वारा स्थानीय पुलिस को इस तरह प्रभावित किया गया कि हमले की तत्काल सूचना पुलिस अधीक्षक को देने के बावजूद ढाई घंटे बाद पुलिस घटना स्थल पर पहुंची तथा डॉ0 सुनीलम के दोनो हाथ तोड़ दिए जाने (हाथ में फैक्चर हो जाने) तथा सिर में चोट लगने तथा एड. आराधना भार्गव को हाथ में फ्रैक्चर तथा सिर में 10 टांके लगने के बावजूद धारा 323 के तहत साधारण मारपीट का मुकदमा दर्ज किया गया जबकि अपराधियों द्वारा प्राणघातक हमला किया गया था।
14. दिनांक 6.11.2010 को पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश पर जन सुनवाई का आयोजन हुआ। परन्तु सबसे अचरज की बात तो यह हुई कि तथाकथित जनसुनवाई का आयोजन अदानी ने अपने कार्यालय में करवा लिया जहॉ उसके गुंडो का  बोलबाला रहा।
15. हमारी जानकारी में आया है कि पेंच व्यपवर्धन परियोजना के अन्तर्गत निर्माण कए जा रहे बांधों का पानी किसानों के सिंचाई की जगह दिए जाने की जगह अदानी बिजली घर हेतु बेचा जाने वाला है। ऐसी स्थिति में भूअर्जन कानून के अन्तर्गत किसी भूमि का जनहित राष्ट्रहित में अधिग्रहण नही किया जा सकता तदानुसार भूअर्जन की कार्रवाई को तत्काल निरस्त कर किसानों की जमीनंे उन्हें वापस लौटाई जायें ।
16. देश की पुनर्वास नीति के प्रावधानों के अनुसार न तो ग्रामसभाओं को पूरी योजना की जानकारी दी गई न ही ग्रामवासियों को मुआवजे सम्बन्धी तथा जमीन के बदले जमीन सम्बन्धी प्रावधानों की जानकारी दी गई ।
17. डूब क्षेत्र में तमाम किसानांे की जमीन को बिना मुआवजे के अधिग्रहित करने की कार्रवाई की गई। उदाहरण के तौर पर बाम्हनवाडा में रूक्मणी वल्द तुलसीराम की 3.39 एकड जमीन 2004 में बिना मुआवजा तथा भूअर्जन की कार्रवाई के ले ली गई 6 वर्षाे से किसान द्वारा खेती नही की जा सकी है। ऐसे सभी किसानों की क्षतिपूर्ति शासन द्वारा दी जाय। क्योंकि खेत में गढ्ढे खोद दिए गए हैं।
18. प्रभावित ग्रामों मे भूमिहीन किसान लगभग 50 प्रतिशत है उनके पुनर्वास को लेकर अब तक कोई ठोस योजना प्रस्तुत नहीं की गई। बिना 50 प्रतिशत इस आबादी के वैकल्पिक रोजगार का प्रबन्ध किए कोई भी प्रोजेक्ट लगाए जाने के हम खिलाफ हैं।
19. पेंच व्यपवर्धन परियोजना की 1986 में प्राप्त पुरानी पर्यावरण स्वीकृति अप्रसांगिक हो गई है।

पुनः पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त किए बगैर परियोजना के निर्माण कार्य पर तत्काल प्रतिबन्ध लगाने के निर्देश जारी किए जाऐ।

इसके बाद भी आगे दमन जारी है और किसानों की सभा में जाते समय डा. सुनीलम को दि. 26 जून, 2011 को गिरफ्तार किया गया और सम्मेलन स्थल से एडवोकेट आराधना भार्गव को भी इसी दिन 44 किसानों के साथ गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया तथा उन्हें 6 दिन तक जेल में कैद रखा गया।

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