जल, जंगल, खनिज की लूट के खिलाफ संघर्ष को तेज करने के लिय जन संघर्ष समन्वय समिति की पहल

न संघर्ष समन्वय समिति की दो दिवसीय बैठक 4-5 अगस्त 2011 को गढ़वाल भवन, नई दिल्ली में सम्पन्न हुई। इस बैठक की कार्यवाही में जन संघर्ष समन्वय समिति के 45 साथियों ने हिस्सा लिया। सुबह 11 बजे बैठक की कार्यवाही शुरू हुई।  एजेंडे के मुख्य बिंदु इस प्रकार थे-

  • भूमि अधिग्रहण कानून के लिए सरकार द्वारा जारी किये गये नये मसौदे पर चर्चा।
  • जन संघर्ष समन्वय समिति के विस्तार के कार्यक्रम पर चर्चा।
  • जन संघर्ष समन्वय समिति के स्वतंत्र पहल पर भावी कार्यक्रम।
  • जन संघर्ष समन्वय समिति के संचालन के तौर-तरीकों पर चर्चा।

चर्चा के बाद तय पाया गया कि-
  • प्रस्तावित बिल को पास होने से रोकने की कोशिश की जानी चाहिए।
  • जल्दी से जल्दी भूमि अधिग्रहण कानून के नये मसौदे पर एक क्रिट्रिक नोट तैयार किया जाना चाहिए।
  • कुछ लोगों की कमेटी बनाई जाये, जो इस नये मसौदे की समीक्षा करे तथा जहां-जहां जन संघर्ष चल रहे हैं, वहां अपनी बात पहुंचाये।
  • राज्यों के स्तर पर भी अलग-अलग जन संघर्षों को एक मंच पर लाने की मजबूत कोशिश हो।
  • जन संघर्ष समन्वय समिति की राज्य स्तर पर भी बैठक आयोजित की जाये।
  • एक एक्शन प्लान तैयार किया जाये।

भूमि अधिग्रहण कानून के नये मसौदे पर साथियों द्वारा व्यक्त की गई मुख्य आपत्तियाँ इस प्रकार थीं :-
  • निजी कंपनियों द्वारा भूमि खरीदने पर पूरी तरह से रोक हो।
  • विकास के मौजूदा स्वरूप, शहरीकरण का बेतहाशा विस्तार तथा अविवेकपूर्ण औद्योगीकरण ने लोगों को विस्थापित किया है। हम इस विकास के माडल को खारिज करते हैं, इसे    प्रस्तावना से हटाया जाये।
  • 73वें संशोधन के बाद भूमि और भूमि संबंधित अधिकार ग्राम सभा के पास आ जाते हैं। अतः भूमि अधिग्रहण को केन्द्र, राज्य और समवर्ती सूची से बाहर किया जाये।
  • हम भूमि को बाजार की वस्तु नहीं मानते, अतः इस अवधारणा को इस नये बिल से हटाया जाये।
  • किसी भी तरह का भूमि अधिग्रहण न किया जाये।
  • सार्वजनिक प्रयोजन को और स्पष्ट किया जाये।

इसके अलावा यह भी तय किया गया कि 3-4 जून 2011 की बैठक में साथियों ने भूमि के संदर्भ में जो बिन्दु निर्धारित किये थे, जिन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता, उन बिन्दुओं की रोशनी में इस नये मसौदे को देखने की जरूरत है। साथियों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि सभी नये मसौदे पर अपने-अपने संघर्ष के साथियों से बात करके अपनी आपत्तियाँ दस दिन में सचिवालय को भेज देंगे।

भूमि अधिग्रहण के नये मसौदे पर साथियों की राय थी कि इसके खिलाफ सेमिनार किये जायें तथा जनमानस को तैयार किया जाये। उन्हें बताया जाये कि हम क्यों इस बिल को खारिज कर रहे हैं। अपने-अपने जिला कार्यालय पर इस मसौदे की प्रतियाँ भी जलानी चाहिए।

इसके बाद साथियों ने तीन अगस्त के कार्यक्रम के लिए बनी कोर कमेटी को भंग करके सर्व सहमति से एक नई कमेटी के सदस्यों तथा संयोजक तथा सह-संयोजक का चुनाव किया। जो इस प्रकार हैं-
जन संघर्ष समन्वय समिति की केन्द्रीय कमेटी
  • रामाश्रय यादवः कृषि भूमि बचाओ मोर्चा, उत्तर प्रदेश; मोना सूरः सेज विरोधी संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश; कुमार चन्द्र मार्डीः विस्थापन विरोधी एकता मंच, झारखण्डलिंगराज आजादः  नियामगिरी सुरक्षा समिति, लांजीगढ, उड़ीसाडॉ. राजेन्द्र शर्माः बेरोजगार युवा संगठन, हरियाणा;  दीप सिंह शेखावतः भूमि अधिग्रहण विरोधी संघर्ष समिति, नवलगढ, राजस्थान; श्रीचन्द्र सिंह डूडीः राजस्थान, बिजली किसान यूनियन; राजस्थान;हरकेश बुगालियाः जन संघर्ष मोर्चा, राजस्थान; अजय कुमार मौर्यः जन विज्ञान समिति, बिहार
  • संयोजक: दीप सिंह शेखावत; सह-संयोजक: रामाश्रय यादव।

इस बात पर भी साथियों की सहमति बनी कि राज्य के स्तर पर भी अलग-अलग संघर्षों से सम्पर्क स्थापित किये जायें तथा राज्य के स्तर पर भी कमेटी का गठन हो तथा संयोजक बनाये जायें। यह कार्य 6 महीने में कर लिया जाये तथा इसके बाद एक राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन किया जाये।

झारखंड के साथी कुमार चन्द्र मार्डी ने बताया कि झारखंड में 9 अगस्त को अन्तर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस के मौके पर भूमि अधिग्रहण का विरोध किया जायेगा तथा इस अवसर पर पुतला दहन भी किया जायेगा।

इसके बाद यह तय हुआ कि 11 सितम्बर 2011 को नयी दिल्ली में जन संघर्ष समन्वय समिति की एक बैठक की जाये।

संघर्षों के कार्यक्रम तय
जन संघर्ष समन्वय समिति की कोर कमेटी की बैठक 11 सितम्बर 2011 को दिल्ली में सम्पन्न हुई। बैठक में संगठनात्मक प्रक्रिया व आगामी गतिविधियों के बारे में चर्चा हुई। इस बैठक में निम्न साथियों ने हिस्सा लिया-
1. लिंगराज आजाद, ओडिशा, 2. वीरेन्द्र विद्रोहीराजस्थान
3. दिनेश शर्मा, राजस्थान, 4. श्रीचन्द सिंह डूडी, राजस्थान     
5. मोना सूर, उत्तर प्रदेश, 6. मीनू सूर, उत्तर प्रदेश, 7. रामाश्रय यादव, उत्तर प्रदेश, 8. कुमार चन्द मार्डी, झारखण्ड, 9. दयामनि बारला, झारखण्ड, 10. अजय मौर्य, बिहार, 11. राजेन्द्र शर्मा, हरियाणा, 12. सुभाष पूनिया, हरियाणा।

बैठक में निहायत व्यक्तिगत कारणों की वजह से संयोजक दीप सिंह शेखावत तथा हरकेश बुगालिया नहीं आ पाये। न आ पाने की सूचना उन्होंने दे दी थी।

बैठक की अध्यक्षता जन संघर्ष समन्वय समिति के सह-संयोजक श्री रामाश्रय यादव ने की। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जन संघर्ष समन्वय समिति के मौजूदा सांगठनिक ढांचे को बरकरार रखा जाये तथा इसमें तीन और साथियों को (कोर कमेटी में) शामिल किया जाये। इन साथियों के नाम हैं- चितरंजन सिंह (इंसाफ), दुलम्भ सिंह (सेज विरोधी संघर्ष, ऊना, हिमाचल प्रदेश), महेन्द्र गोदारा (हरियाणा) तथा तय पाया गया कि सह-संयोजक इन साथियों से सम्पर्क करके इसकी जानकारी उन्हें दे दें और उनकी सहमति ले लें।

इसके अलावा बैठक में आगामी कार्यक्रम तथा गतिविधियों से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये-
  • जन संघर्ष समन्वय समिति का राष्ट्रीय कार्यालय नवलगढ़, राजस्थान में होगा तथा वहीं से समन्वयन का कार्य किया जायेगा।
  • भूमि अधिग्रहण कानून के संदर्भ में सभी राज्यों के साथी राज्य स्तर का पर्चा तैयार करेंगे तथा जन संघर्ष समन्वय समिति के कार्यालय नवलगढ़, राजस्थान को जल्दी से भेज देंगे।
  •  इसके बाद एक राष्ट्रीय स्तर का पर्चा तैयार किया जायेगा।
  • भूमि अधिग्रहण कानून पर एक पुस्तिका भी तैयार की जाये, जिसमें इस कानून पर समीक्षात्मक नजर डालते हुए इसके पीछे की राजनीति तथा अन्तःसंबंधों पर बात की जाये।
  • सभी जनसंघर्षों से जुड़े साथी अपने कार्यक्रम तथा संघर्षों के बारे में रिपोर्ट लिखकर भेजें।
  • 30 नवम्बर 2011 को राष्ट्रीय स्तर पर अपने-अपने क्षेत्र में प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया जाये।
  • 30 नवम्बर 2011 के कार्यक्रम से संबंधित पोस्टर तथा पर्चा भी तैयार किया जाये। पर्चे में तीन मुख्य मांगें तथा एक स्थानीय जन संघर्ष से जुड़ी मांग हो। जैसे-

  1. जल, जंगल, जमीन, खनिज की लूट बंद करो। प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण कानून वापस लो।
  2. सेज कानून रद्द करो।
  3. मानवता का नाश करने वाली सभी परमाणु ऊर्जा संबंधी परियोजनाएं रद्द करो।
  4. प्रांतीय स्तर पर जन संघर्षों की बैठकें की जायें, दूसरे जन संघर्षों से भी सम्पर्क साधा जाये। ये भी तय हुआ कि जन संघर्ष समन्वय समिति के साथी दूसरे राज्यों के संघर्षों की बैठकों तथा कार्यक्रमों में शिरकत करें। इन साथियों के नाम भी तय किये गये।

  • वैचारिक स्पष्टता तथा अन्य मसलों पर विचार-विमर्श करने के लिए जन संघर्ष समन्वय समिति की बैठकें की जायें।
  • जन संघर्ष समन्वय समिति का कार्यालय चलाने से संबंधित खर्चों के लिए साथियों ने कुल 22,000 रुपये सालाना चंदा देना तय पाया।

इसके अलावा कुछ साथियों ने अपने जन संघर्षों के कार्यक्रमों को सामने रखा-

गंगा एक्सप्रेस-वे विरोधी आंदोलन से जुड़े साथी रामाश्रय यादव ने 30 अक्टूबर से 18 नवम्बर 2011 तक होने वाली बलिया से नोएडा तक, गंगा एक्सप्रेस-वे विरोधी यात्रा के बारे में जानकारी दी।

नियामगिरि सुरक्षा समिति (वेदांत विरोधी आंदोलन) से जुड़े साथी लिंगराज ने 26 सितम्बर 2011 को नियामगिरी में होने वाली एक बड़ी विरोध सभा के बारे में जानकारी दी तथा उन्होंने यह भी बताया कि 30 नवम्बर 2011 के कार्यक्रम के लिए वह तथा उनके साथी 15 नवम्बर से ही सम्पर्क सभायें करना शुरू कर देंगे।

हरियाणा में गोरखपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र विरोधी आंदोलन से जुड़े साथी राजेन्द्र शर्मा ने बताया कि हाल ही में धरने पर बैठे एक और किसान की मौत हो गई है जिसकी याद में एक शोक सभा का आयोजन तथा सभी कार्यकर्ताओं के साथ सितम्बर माह में एक बैठक का आयोजन किया जायेगा। राजस्थान के कुछ साथियों ने इस बैठक में शिरकत करने का वादा किया।
नोटः जन संघर्ष समन्वय समिति के केन्द्रीय कार्यालय का पता इस प्रकार हैः
श्री दीपसिंह शेखावत        
राष्ट्रीय संयोजक: जन संघर्ष समन्वय समिति
शाप नं0-1, कल्पतरू एजेंसी, चौ0 शुभकरण कॉम्पलेक्स, (तहसील भवन के सामने)          
नवलगढ़, जिला- झुंझुनू-333042 (राजस्थान)

मोबाः 09460148924, Email id : jsssindia11@gmail.com
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