पुलिस के संरक्षण में अंगुल में जिंदल स्टील के सुरक्षा गार्ड तथा गुंडों द्वारा विस्थापितों पर नृशंस हमला


सरकारी दमन और कारपोरेट हिंसा का सामना करते हुए ओडिसा के तमाम जन संघर्ष अपने वन, जल, भूमि, खनिजों और अन्ततः अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्षरत हैं। पोस्को एवं वेदांता कंपनी के साथ ही साथ जिंदल कंपनी के खिलाफ भी संघर्ष तीखा होता जा रहा है।

जहां पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति के नेताओं अभय साहु, नारायण रेड्डी को जेलों में ठूंस दिया गया है, वेदान्ता के खिलाफ संघर्षरत आदिवासियों पर लाठी चार्ज करके 47 लोगों को जेल में डाल दिया गया है वहीं पर छत्तीसगढ़ के रायगढ़ इलाके में सरकारी शह से दमन उत्पीड़न करने के बाद अब राष्ट्रीय ध्वजके महान प्रेमी कांग्रेसी सांसद  नवीन जिंदल ओडिसा के अंगुल क्षेत्र में अपनी हिंसावादी अहिंसातथा लूट आधारित देशभक्तिऔर अवैधानिक कानूनी राजके सहारे निर्मम दमन-उत्पीड़न पर आमादा है। जब देश गणतंत्र दिवस के जश्न का ऐलान कर रहा था उसी समय 25 जनवरी को अंगुल में पुलिस दमन का सामना करते हुए गामीण गणतंत्र का असली चेहरा देख रहे थे।

अभी 19 जनवरी 2012 को कालियाकता गांव (जो कि पूरी तरह से विस्थापित हो चुका है) के लोग कंपनी के अधिकारियों को अपना दुखड़ा सुनाने कंपनी के कार्यालय पहुंचे, किंतु कंपनी के सिक्योरिटी गार्ड्स ने अपने अधिकारियों के कहने पर गांव वालों के साथ न सिर्फ दुर्व्यवहार किया बल्कि उनके साथ मारपीट भी की। यहां तक कि इन सिक्योरिटी गाडर्स ने गर्भवती महिलाओं को भी नहीं बख्शा। कंपनी की इस धोखाधड़ी तथा दमनकारी रवैये से आहत 40 गांवों के प्रभावित लगभग 4000 लोगों ने इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। इसके बाद प्रभावित लोगों ने निर्माण कार्य को शांतिपूर्ण तरीके से रोक दिया। कंपनी तथा सरकारी अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों के साथ 24 जनवरी 2012 को समस्या को सुलझाने के लिए बड़ा केरेजेंग विरनकेश्वर मंदिर में एक साझा बैठक करने का वादा किया। मगर तय दिन पर कोई भी अधिकारी नहीं आये। इसलिए गांव वालों ने अगले दिन कंपनी के अधिकारियों से मिलने का निर्णय किया।

अगले दिन 25 जनवरी 2012 को भी लगभग चार हजार स्थानीय विस्थापित लोग जिनमें महिलायें, पुरुष तथा बच्चे भी शामिल थे, कंपनी के अधिकारियों को अपनी समस्यायें सुनाने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से कंपनी के सुर्बानपुर गेट पर एकत्रित हुए।

इस मौके पर कंपनी के सिक्योरिटी गार्ड्स तथा जिले व स्थानीय पुलिस थाना (निशा सिलपांचल थाना) के अधिकारी व मजिस्ट्रेट भी मौजूद थे। इन्होंने पूर्व निर्धारित तरीके से कंपनी के गेट को खोलकर लोगों को अंदर आने दिया। सबसे आगे महिलायें थीं जिनके साथ कुछ पुरुष थे जो कि निहत्थे तथा शांतिपूर्वक साथ चल रहे थे। अचानक ही कंपनी के सिक्योरिटी गाडर्स ने इन बेकसूर व भोले लोगों पर हमला कर दिया। इस कायराना व हिंसक हमले में बडी संख्या में महिला, पुरुष व छोटे बच्चे जो अपनी मां की गोद में थे कंपनी के इस वहशियाना हमले का शिकार बने। स्थानीय पुलिस ने भी कंपनी के सिक्योरिटी गाडर्स की इस क्रूरता में अपना पूरा सहयोग दिया। इस हमले में लगभग 100 लोग घायल हुए तथा 94 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। घायलों में पुरुष, महिला एवं बच्चे भी शामिल हैं। पुलिस तथा कंपनी के अधिकारियों ने घायल मरीजों को किसी भी प्रकार की मदद नहीं पहुंचाई। घायल मरीजों को किसी तरह लोगों ने अंगुल अस्पताल तक पहुंचाया। गंभीर रूप से घायल मरीजों को इलाज के लिए कटक तथा भुवनेश्वर के अस्पतालों में भर्ती करवाया गया। जिंदल कंपनी के वर्दीधारी गुंडों ने औरतों के कपड़े फाड़ दिये तथा बेरहमी से उन्हें अपने जूतों तले रौंदा। बिरनकेसवर सिलपांचल क्षतिग्रस्त प्रजासंघ, अंगुल जो कि प्रभावित लोगों का एक बड़ा संगठन है, कंपनी के खिलाफ बहुत मजबूती से अपने आंदोलन को आगे बढ़ा रहा है।
इस निर्मम हमले में 3 वर्ष के एक बच्चे समेत कई महिलायें बसंती प्रधान, रतानी प्रधान, सांतिलता बेहरा, ललिता प्रधान, उपासी प्रधान, तारा प्रधान, लिली बिसवाल, अहल्या प्रधान, यशोदा साहू, हेमा प्रधान, बारी साहु, सुकंती प्रधान, मिनी राउत, बिनोदिनी राउत और गंभीर रूप से घायल पुरुषों में दारा सेठी, नीलमनि धाल, निसा बेहरा, सुधाकर साहु,     सौभाग्य बेहरा, बीरेन्दर सिंह और अमर साहु शामिल हैं।
इसके बाद घटना की गंभीरता से घबराये प्रशासन ने ग्रामीणों की शिकायत पर जिंदल स्टील प्राइवेट लिमि. के वरिष्ठतम सुरक्षा अधिकारी के.के. चोपरा और कंपनी की अंगुल इकाई के हेड अजीत सिंह को बाद में गिरफ्तार किया।

वास्तव में 25 जनवरी 2012 का कंपनी का यह कायराना कारनामा, जिसे प्रशासन का भी पूरा समर्थन था, कंपनी की वादाखिलाफी, धोखाधड़ी की उपज था। कंपनी की वादाखिलाफी के खिलाफ एक लम्बे समय से लोग संघर्ष करते आ रहे हैं लेकिन एकाएक स्थितियां तब गंभीर बन गयीं जब कंपनी ने भूमि अधिग्रहण से प्रभावित गांवों में कंपनी की चहारदीवाली बनकर पूरा होते ही प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा देना, जल आपूर्ति आदि सुविधाओं को एकाएक बंद कर दिया। यह कारनामा कंपनी ने अक्टूबर 2011 से करना आरंभ कर दिया था और इसकी कोई पूर्व सूचना नहीं दी गयी थी।
प्रभावित ग्रामीण लगातार कंपनी के अधिकारियों, अंगुल जिला प्रशासन तथा राज्य सरकार को अपनी समस्याओं से अवगत कराते रहे, मांग पत्र देते रहे, धरना-प्रदर्शन करते रहे और कंपनी की मनमानी का विरोध करते रहे लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गयी, ग्रामीणों की बातों को अनसुना कर दिया गया। ग्रामीण जब कंपनी के अधिकारियों से मिलने का प्रयास कर रहे थे तो उन्हें 19 जनवरी 2012 को सुरक्षा कर्मियों द्वारा अपमानित किया गया, 24 जनवरी को वादे के बाद भी तय स्थान तथा तय समय पर कंपनी एवं सरकार के अधिकारी नहीं आये और 25 जनवरी को ग्रामीणों की निमर्मता से पिटाई की गयी।

जिंदल स्टील प्राइवेट लिमिटेड ने अंगुल जिले के बानरपाल एवं छेंदीपाडा ब्लाकों की 64,000 एकड़ जमीन का सरकार की मदद से अधिग्रहण करके वर्ष 2006 में निर्माण कार्य शुरू किया। प्रस्तावित स्टील प्लांट (जिंदल स्टील प्रा. लिमि.) के कारण 40 गांवों के 25,000 परिवारों की लगभग 1 लाख आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।

भूमि अधिग्रहण के समय जिंदल कंपनी ने प्रभावित ग्रामीणों को स्थायी नौकरी, तकनीकी प्रशिक्षण देने और बेरोजगारों-बुजुर्गों  को क्षतिपूर्ति भत्ता देने के साथ ही साथ क्षेत्र का विकास, सुविधाओं का विकास, समुचित ढंग से पुनर्वास का वादा किया था। अब जब प्रभावित, विस्थापित लोग इन वादों को पूरा करने के लिए दबाव बना रहे हैं तो लोगों को राज्य एवं कारपोरेट हिंसा का शिकार बनाया जा रहा है तथा उनकी बस्तियों को जल की आपूर्ति भी बंद कर दी जा रही है।

25 जनवरी की हिंसात्मक घटना तथा कंपनी-शासन की निर्मम कार्यवाही को अंजाम देने के लिए प्रशासन ने 12 प्लाटून कंपनी तैनात कर रखा था और इनकी मदद के लिए कंपनी के सुरक्षा कर्मी और भाड़े के गुण्डे भी तैनात थे। यह एक पूर्व नियोजित कारनामा था जिससे कि गांव के प्रभावित लोगों को ऐसा सबक सिखाया जाय जिससे वे फिर कभी भविष्य में अपनी मांगों को सामूहिक रूप से उठाने की हिम्मत न कर सकें। इतने जुल्म, आतंक के बाद भी लोग डिगे नहीं बल्कि उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा और कंपनी के साइट पर किसी भी तरह के निर्माण कार्य को होने से रोके रखा है। धरना और भूख हड़ताल जारी रखी गयी है।

इन परिस्थितियों में राज्य मानवाधिकार आयोग ने हस्तक्षेप करते हुए अंगुल जिले के एस.पी. से 4 हफ्ते के अंदर पूरी घटना की रिपोर्ट देने को कहा है। इसी बीच 4 फरवरी 2012 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इसी तरह की रिपोर्ट जारी रखने का निर्णय लिया है।

8 फरवरी को क्षतिग्रस्त प्रजा संघ (प्रभावित लोगों का संगठन जो इस जन संघर्ष की अगुवाई कर रहा है) ने 12 घण्टे की बजाय चौबीसों घण्टे लगातार क्रमिक अनशन जारी रखने का निर्णय लिया है। यह धरना जे.एस.पी.एल. कंपनी के गेट पर चल रहा है।

इस बीच 3 फरवरी को महिला आयोग की सचिव/सदस्य ने अंगुल अस्पताल में आकर घायल महिलाओं के बयान लिए। राज्य महिला आयोग ने इस घटना पर नाराजगी व्यक्त करते हुए एस.पी. अंगुल को निर्देशित किया है कि वे दोषी लोगों के खिलाफ समुचित कार्यवाही करें।

15 फरवरी 2012 को जे.एस.पी.एल. कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर ने प्रोजेक्ट साइट पर आंदोलनकारियों से मुलाकात करके घटना के प्रति दुःख व्यक्त किया। कंपनी के इस अधिकारी ने कहा कि उनकी कंपनी सामाजिक रूप से जिम्मेदार है और जनता के हित में कार्यों को करेगी। इस मौके पर आंदोलनकारियों ने घोषणा की कि जब तक उनकी निम्नलिखित मांगें पूरी नहीं की जातीं तब तक वे संघर्ष जारी रखेंगेः-

  1. सर्वे का काम पूरा किया जाय तथा युद्धस्तर पर कार्य करते हुए प्रत्येक विस्थापित तथा प्रभावित परिवार को जाब कार्ड वितरित किया जाय।
  2. प्रत्येक प्रभावित किसान को 50 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जाय तथा लैण्ड लूजर्स को कंपनी में कार्य दिया जाय।
  3. योग्यता के अनुसार प्रत्येक प्रभावित-विस्थापित परिवार के युवकों-युवतियों को कंपनी में स्थायी रूप से काम दिया जाय तथा उन्हें तकनीकी शिक्षा भी उपलब्ध करायी जाय।
  4. प्रत्येक प्रभावित ग्रामवासी को कंपनी का शेयर होल्डर अनिवार्य रूप से बनाया जाय।
  5. लैण्ड लूजर्स, प्रभावित-विस्थापित ग्रामवासियों के लिए कंपनी में 90 प्रतिशत स्थान आरक्षित रखे जायँ तथा उनकी नियुक्ति अविलंब की जाय।
  6. ऐसे विस्थापित-प्रभावित लोग जो पहले से ही कंपनी में कार्यरत हैं या उनके अंदर काम करने की क्षमता है- को कंपनी में स्थायी नौकरी दी जाय। स्थायी नियुक्ति का नियुक्ति पत्र जारी किया जाय यह नियुक्ति पत्र जे.एस.पी.एल. के गाइड लाइंस के मुताबिक जारी किये जायँ।
  7. ऐसे प्रभावित या विस्थापित जन जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है या वे विकलांग हैं, तो उन्हें 5000 रुपये महीना उनकी जीविका के लिए दिया जाय।
  8. अधिग्रहीत क्षेत्र के तालाबों तथा वृक्षों का उचित दाम एक किश्त में अदा किया जाय।
  9. प्रभावित या विस्थापित होने वालों में से यदि कोई व्यक्ति कंपनी में काम नहीं करना चाहता तो उसे एकमुश्त 50 लाख रुपये दिये जायँ।
  10. गोचर भूमि, दाह संस्कार के लिए आरक्षित भूमि तालाब, जो अधिग्रहीत भूमि क्षेत्र में है उसके बदले उतनी ही भूमि पक्के पट्टे के रूप में दी जाय।
  11. विस्थापित परिवारों को आवास तथा आवासीय स्थल के पास (रहन-सहन के लिए) भूमि का स्थायी- पक्का-पट्टा दिया जाय।
  12. बिजलीकरण, पौध रोपण, कृषि मशीनों की आपूर्ति, खेलकूद का मैदान, स्कूल, रोड, पेयजल की आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवायें, खाद्यान्न का स्टाक तथा दुर्घटना आदि में मदद जैसे विकास के कार्य जे.एस.पी.एल. द्वारा क्षतिग्रस्त प्रजा संघ के माध्यम से क्रियान्वित कराये जायँ।
  13. प्रभावित-विस्थापित लोगों को निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधायें तथा उनके बच्चों को जिंदल कंपनी के स्कूल में निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की जाय।
  14. क्षतिग्रस्त प्रजा संघ को एक सुसज्जित कार्यालय उपलब्ध कराया जाय तथा उसके प्रार्थना पत्रों पर अविलम्ब कार्यवाही की जाय।
  15. विस्थापितों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र करने वाले सुरेश कुमार शर्मा को जे.एस.पी.एल. से बर्खास्त किया जाय।
  16. जे.एस.पी.एल. कंपनी राज्य सरकार की नीति का पालन करते हुए भू-जल का इस्तेमाल नहीं करे। कंपनी का पावर प्लांट तब तक बंद रखा जाय जब तक कंपनी नदी से पानी का इंतजाम नहीं कर लेती।
  17. जे.एस.पी.एल. प्रभावित तथा आसपास के लोगों को हर मामले में प्राथमिकता दे।
  18. कालियाकता गांव की अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा तुरंत दिया जाय तथा उनके पुनर्वास की नियमानुसार व्यवस्था की जाय।
  19. 25 जनवरी 2012 की घटना में घायल सभी लोगों की चिकित्सकीय खर्चों का भुगतान जे.एस.पी.एल. एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा किया जाय।
  20. जे.एस.पी.एल. एवं प्रशासन निर्दोष लोगों पर लगाये गये मुकदमों को वापस ले।
- अमूल्य कुमार नायक एवं आई.एस.ई.डी.
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