गंगा एक्सप्रेस वे विरोधी आंदोलन


गाँवों-गाँवों में किसान शांति सेना का गठन हुआ प्रारंभ


कृषि-भूमि बचाओ मोर्चा उ. प्र. द्वारा अगस्त-सितंबर, 2010 में सघन जनजागरण एवं बड़ी-बड़ी जन सभायें की गयीं। उ. प्र. सरकार द्वारा गंगा एक्सप्रेस वे परियोजना के लिए तत्काल भूमि अधिग्रहण की मंशा से गाजीपुर जनपद की तीनों प्रभावित तहसील सैदपुर, सदर व मुहम्मदाबाद में तहसीलदार की अध्यक्षता में भूमि अधिग्रहण कमेटियों का गठन किया गया और उसके बाद बल प्रयोग करने की नियत से धारा 144 लागू की गयी। यह जानकारी अगस्त के अंत में हिन्दी अखबारों में प्रकाशित हुई। तब कृषि भूमि बचाओ मोर्चा का एक प्रतिनिधि मंडल ने क्षेत्र के प्रमुख किसानों, छात्रों, बुद्धिजीवियों व विपक्षी पार्टियों से मिलकर 1 सितंबर, 2010 को जनपद मुख्यालय के समता भवन में सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में कृषि भूमि बचाओ मोर्चा के रामरूप दादा, राघवेन्द्र जी, अमरनाथ यादव, शिवाजी सिंह, रामाश्रय यादव, जयशंकर सिंह, कुसुम तिवारी, श्यामसुन्दर यादव, किसान नेता-बाबू लाल मानव, किसान सभा के राजेन्द्र यादव, समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष रामधारी यादव, राजेश राय (पप्पू), पूर्वसांसद जगदीश कुश्वाहा, सी.पी.आई. के जिला सचिव अमेरिका जी, कांग्रेस से कौशलेन्द्र सिंह आदि लोगों ने भाग लिया और सर्व सम्मति से निर्णय लिया गया कि पूरे प्रदेश में सघन जनजागरण एवं बड़ी बड़ी जन सभायें आयोजित की जाये।

प्रथम चरण में गाजीपुर जनपद का चयन हुआ और जनपद के प्रभावित क्षेत्रों में आठ बड़ी सभाओं का आयोजन करने का निर्णय लिया गया। आठ अलग-अलग सभाओं के आठ प्रभारी नियुक्त किये गये। पहली जनसंभा 9 सितंबर 2010 को नारीपंचदेवरा में अमरनाथ यादव के नेतृत्व में, दूसरी 11 सितंबर 2010 को जंगीपुर मंडी मैदान में रामधारी यादव (सपा जिलाध्यक्ष) के नेतृत्व में तथा तीसरी 13 सितंबर 2010 को महुवी चट्टी पूर्व विधायक, राजेन्द्र यादव के नेतृत्व में, चौथी जनसभा 15 सितंबर 2010 को सिधौना बाज़ार, रामाश्रय यादव के नेतृत्व में, पांचवीं जनसंभा 17 सितंबर 2010 को वड़ौरा में राजेश राय (पप्पू) के नेतृत्व में, छठी जनसभा 18 सितंबर 2010 मुड़ियार स्कूल मैदान में मोर्चे के प्रदेश प्रवक्ता शिवाजी सिंह के नेतृत्व में, सातवीं जनसभा 20 सितंबर 2010 को बालापुर में मोर्चे के अध्यक्ष राघवेन्द्रजी के नेतृत्व में, आठवीं जनसभा संयोजक रामरूप दादा के नेतृत्व में 21 सितंबर 2010 को आयोजित की गयी। सभी जन सभाओं में पांच से दस हज़ार किसानों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। धारा 144 को तोड़ते हुए और इस नारे के साथ कि-    ‘‘धरती मेरी माता है जनम-जनम का नाता है।  जान देंगे, ज़मीन नहीं देंगे।।’’
शासन भारी जनाक्रोश के सामने घुटने टेकते हुए भूमि अधिग्रहण की कोई कार्यवाही नहीं कर सका। तहसील कर्मियों से यह सूचना मिली की शासन ने खसरा खतौनी की नकल परियोजना निर्माता जे.पी. के मुख्यालय पर भेज दी है। इन जन सभाओं की एक बड़ी उपलब्धि यह भी रही कि सरकारी कर्मचारियों, वकीलों व नाम न बताने के शर्त पर अधिकारियों ने भी इन जनसभाओं का समर्थन किया।

अक्टूबर 2010 में शिवाजी सिंह के नेतृत्व में किसान शांति सेना के गठन का कार्य शुरू हुआ जिसमें सभी प्रभावित गांवों से 10-10 युवाओं का चयन किया जा रहा है जिनका प्रशिक्षण फरवरी 2011 में आयोजित किया जायेगा। - शिवाजी सिंह, सैदपुर

प्रान्तीय स्तर पर साझी पहल का फैसलाः साझे मंच का गठन

दिनाकं 14-15 दिसबंर 2010 को लखनऊ में साथी मोनासूर की अध्यक्षता में विभिन्न सामाजिक सगंठनों, मंचों की संयुक्त बैठक में एकजुट पहल, एक साझे मंच का निर्माण तथा काम के अधिकार, ससंाधनों पर लोक हक़दारी तथा मान सम्मान युक्त जीवन के बुनियादी मुदद्ों पर मिलजुल कर काम करने का निर्णय लिया गया। प्रान्तीय स्तर पर गठित इस साझे मंच का नाम लोकतांित्रक जन अधिकार मंच रखना सर्वसम्मति से तय पाया गया। मंच सचंालन के बुनियादी तौर तरीकों को तय करने के साथ ही ‘‘असमानता, भेद भाव’’ की समाप्ति को एक मूल उद्देश्य के रूप में स्वीकारा गया।

मंच के संचालन के लिये एक 5 सदस्यीय समन्वयन समिति जिसमें रामकुमार (डग), मोना सूर (बिहान), आर0पी0 शाही (इंसाफ), राम प्रताप (लोक हकद़ारी मोर्चा) एवं कमल कुमार (जनकेन्द्रित विकास महासमिति) हैं का गठन किया गया तथा तय पाया गया कि भविष्य में बडी़ बैठक करके एक विस्तारित समिति गठित की जायेगी। लोक तांंित्रक जन अधिकार मंच के सचंालन के लिये लोक हक़दारी मोर्चा को सचिवालय की भूमिका निभाने की जिम्मेदारी दी गयी।
बैठक में 13 जिलों में वन अधिकार के मुद्दे को लेकर 30 जनवरी 2011 तक बैठक कर लेने, मुद्दे चिन्हित कर लेनेे और फरवरी 2011 में डग द्वारा वन अधिकार पर सोन भद्र में आयोजित जन सुनवाई में इन 13 जिलों से सहभागिता का भी निर्णय लिया गया।

साथ ही मनरेगा, सामाजिक उत्पीडऩ , भूमि के पट्टे जैसे मुद्दों पर लगातार काम करने हस्तक्षेप करने का सर्वसम्मत से निर्णय लिया गया। यह भी तय पाया गया कि सोनभद्र में हो रही जन सुनवाई के संदर्भ में तैयारी बैठक तथा बाद में प्रान्तीय स्तर पर बैठक करके वन अधिकार के मुद्दे पर सघ्ंार्ष की रणनीति को अंंितम रूप दिया जायेगा।

इस बैठक में प्रान्तीय स्तर के जनमंचों डायनैमिक एक्शन ग्रुप (डग), लोक हक़दारी मोर्चा, इण्डियन सोशल एक्शन फोरम, 0प्र0 (इंसाफ, 0ू पी0), जनकेन्द्रित विकास महासमिति तथा बिहान ने शिरकत की।

वैचारिक स्तर पर स्पष्टता के लिए, ‘तात्कालिक मुद्दा एवं दूरगामी सोचतथा न्यूनतम सहमति एवं अधिकतम योगदानकी बुनियादी समझ को व्यावहारिक आकार देने के लिए शीघ्र ही प्रांतीय स्तर पर विचार-विमर्श के आयोजन की भी बात तय पायी गयी।

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