पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति 8 अप्रैल को घेरेगी विधान सभा

13 मार्च की रैली की घोषणा
पोस्को कम्पनी के विरोध में चलने वाला संघर्ष धीरे-धीरे छठवां साल पूरा करने जा रहा है तथा तमाम जन संघर्षों का समर्थन भी प्राप्त करने में कामयाब रहा है। 13 मार्च को परियोजना के विरोधियों ने कम्पनी, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के विरोध में नारे लगाते हुए एक रैली निकाली और प्रस्तावित परियोजना स्थल का प्रवेश द्वार माने जाने वाले बालीटुठ में इकट्ठा हुए। राजनीतिक नेताओं और विस्थापन विरोधी कार्यकर्ताओं ने इस सभा को सम्बोधित किया। राजनीतिक दलों- सी.पी.आई, सी.पी.एम., सी.पी.एम.एल. (एन डी), जे.डी., फारवर्ड ब्लाक, कांग्रेस के अलावा बस्ती सुरक्षा मंच, बस्ती उन्नयन परिषद, उड़ीसा आदिवासी अधिकार अभियान, जन अधिकार मंच, वन वासी सुरक्षा परिषद, युवा भारत (पश्चिम बंगाल), जन चेतना मंच (छ.ग.), निशान, एकता परिषद तथा वेदांत युनिवर्सिटी विरोधी आंदोलन समेत 36 से ज्यादा जन संगठनों-जन संघर्षों ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सेदारी ली। सभी वक्ताओं ने एक स्वर से कहा कि- ‘‘खून का सागर बहेगा, लेकिन पोस्को नहीं आने पायेगा।’’


हर बार की तरह इस बार भी राज्य सरकार के इशारे पर पुलिस दमन पर आमादा थी। इस विरोध रैली, सभा को नाकामयाब करने की पूरी कोशिश की गयी। रैली से एक दिन पहले पी.पी.एस.एस. के एक स्थानीय नेता सूरदास जो सरपंच भी हैं को कुजंग पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था तथा उन्हें फर्जी मुकदमे में फंसाने की फिराक में थी। रैली ने पुलिस को चेतावनी दी कि वह अपनी हरकतों से बाज आये।

परियोजना के विरोध में आंदोलन की अगुवाई करने वाली पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति ने यह रैली आयोजित की। पीपीएसएस के नेता अभय साहू ने कहा कि इस परियोजना से हजारों लोगों का विस्थापन होगा और उनकी पान की खेती उजड़ जाएगी, इसलिए वे इस परियोजना का विरोध जारी रखेंगे।

इधर कम्पनी अपने समर्थन में कुछ लोगों को इक्ट्ठा करके समृद्धि एवं विकास का नारा लगवा रही है। परियोजना विरोधियों की सभा से करीब पांच किलोमीटर दूर परियोजना समर्थकों ने भी एक बैठक आयोजित की। पोस्को बंदरगाह और संयंत्र कामगार संघ के बैनर तले आयोजित यह बैठक पोलंग गांव में की गई। करीब सौ लोगों की इस सभा में जिसमें 90 फीसदी लोग बाहर से लाये गये थे, वक्ताओं ने कहा कि परियोजना से क्षेत्र में समृद्धि आएगी और लोगों को रोजगार मिलेगा। परंतु अभय साहु कहते हैं कि आजाद भारत में आज तक तकरीबन 9 करोड़ लोगों को वनों, पहाड़ों से विस्थापित किया गया और आज उनका कुछ अता पता नहीं है, विकास की बात छोड़ दीजिए। साहु कहते हैं कि विकास तो मुनाफाखोरों का होगा, कम्पनियों का होगा और कम्पनी की दलाली करने वाले ये तथाकथित विकासवादी भविष्य की गंभीरता को नहीं देख पा रहे हैं। आगे आने वाली पीढ़ियां इन्हें कभी माफ नहीं करेंगी। परियोजना विरोधियों  का कहना है कि परियोजना का समर्थन करने वाले लोग सरकार तथा कम्पनी के द्वारा प्रायोजित लोग हैं।

पी.पी.एस.एस. ने इस मौके पर ऐलान किया है कि वे विधानसभा के मौजूदा सत्र के आखिरी दिन 8 अप्रैल को विधानसभा का घेराव करेंगे। इस प्रदर्शन में देश के तमाम जनसंघर्षों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। - संतोष प्रधान, उड़ीसा से



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