थर्मल पावर प्लांट का विरोध कर रहे किसानों पर पुलिस ने चलाई गोली: 2 की मौत सैकड़ों घायल


आन्ध्र प्रदेश के सिरीकाकुलम जिले के सोमपेटा मण्डल के 30 गांवों को उजाड़कर बनाये जाने वाले थर्मल पावर प्लांट के विरोध में प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों गांव वालों पर 14 जुलाई 2010 को पुलिस ने लाठी चार्ज किया तथा गोलियां चलाईं। इस घटना में दो व्यक्ति मारे गये तथा दर्जनों लोग घायल हो गये। 45 पुलिस कर्मी भी इस घटना में घायल हुए। बरूआ गांव के पास हुई इस फायरिंग में लक्कावरम गांव के जी. कृष्णमूर्ति तथा पलासापुरम गांव के बांदी जोगा राव की मृत्यु हो गई थी। गांव वालों के अनुसार दो और व्यक्ति के. वेणुगोपाल राव तथा ई. मोहन राव भी पुलिस फायरिंग में मारे गये। इस विरोध प्रदर्शन में चार स्थानीयवासी भी पुलिस की गोली से घायल हुए।

यह घटना उस वक्त शुरू हुई जब बरूवा, पलासापुरम, लक्कावरम, जानकीली, जानकीभद्र तथा गोलागोंडा गांव के तकरीबन 5 हजार लोगों ने नागार्जुन कन्स्ट्रक्शन कंपनी के अधिकारियों को निर्माण कार्य रोकने को कहा। कंपनी के अधिकारियों के मना करने तथा कंपनी के गुंडों द्वारा हमला करने के बाद गांव वालों ने कंपनी के कार्यालय को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद गांववालों ने कंपनी के अधिकारियों तथा गुंडों को वहां से खदेड़ दिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस तथा मीडिया की वैन को भी जला दिया। उनका आरोप था कि मीडिया उनके आंदोलन को अनदेखा कर रहा है।

इस घटना के कुछ ही दिन पहले आन्ध्र प्रदेश सरकार ने सिरीकाकुलम जिले के सोमपेटा मंडल के गांवों की जमीन का जबरदस्ती अधिग्रहण करने के लिए 2,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी थी। गौरतलब है कि सरकार इस क्षेत्र में 2640 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट स्थापित करना चाहती है। इस प्लांट का निर्माण नागार्जुन कन्सट्रक्शन कंपनी कर रही है। स्थानीय लोग इस पावर प्लांट का जबरदस्त विरोध कर रहे हैं। सरकार ने इन गांवों में धारा 144 लगा दी थी तथा स्थानीय पुलिस घूम-घूम कर क्षेत्र में लाउडस्पीकर पर घोषणाएं करके लोगों को धमका रही थी कि वह इस प्लांट का विरोध न करें। हालांकि स्थानीय जनता इस गैरन्यायिक, थोपे गये हिंसात्मक विकासका जम कर विरोध कर रही है। पुलिस स्थानीय गांव वालों तथा कार्यकर्ताओं पर झूठे केस थोप रही है।
स्थानीय गांव वालों की मत्स्यकारा इक्या वैदिका तथा पर्यावरण परिरक्षा समिति इस परियोजना का विरोध कर रही है। इस परियोजना से लगभग 30 गांव के हजारों लोग प्रभावित होंगे। इनमें कृषक, मछुआरे तथा अन्य काम करने वाले लोग शामिल हैं।

इस विरोध प्रदर्शन का असर यह हुआ कि गोलीकाण्ड के अगले दिन ही राष्ट्रीय पर्यावरण अपील प्राधिकरण ने इस परियोजना की मंजूरी को रद्द करते हुए सरकार पर तथ्यों से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है तथा साथ ही सरकार से यह भी कहा है कि वह दूसरी परियोजनाओं को मंजूरी देने से पहले सारे दलदली इलाके की पहचान कर ले। गौरतलब है कि पर्यावरणविद तथा स्थानीय गांववालों का कहना है कि यह क्षेत्र दलदली क्षेत्र है तथा पर्यावरण की दृष्टि से बहुत नाजुक है और इस पावर प्लांट के लगने से यहां का ‘‘ईको सिस्टम’’ पूरी तरह से टूट जायेगा।

गोलीकाण्ड के अगले दिन (15 जुलाई) आंध्र प्रदेश विधान सभा में टी.डी.पी., सी.पी.एम. आदि दलों ने इस गोलीकाण्ड की जांच कराने, परियोजना रद्द कराने तथा राज्य के एक मंत्री जो प्रस्तावित परियोजना स्थल जिस इलाके में स्थित है उसी इलाके से विधायक हैं तथा जिन पर कम्पनी के साथ साँठ-गाँठ का आरोप भी है; के इस्तीफे की मांग करते हुए हंगामा किया तथा सत्र की कार्यवाही को रुकवा दिया। कुछ सदस्यों को विधानसभा सत्र से निलंबित भी कर दिया गया है।

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